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रोही बाईपास के दोबारा टूटने पे क्या बोले कौशाम्बी के जनप्रतिनिधि

कौशाम्बी जनपद के नगरपालिका भरवारी को जाम से छुटकारा दिलाने के लिए भरवारी के बाहर बाहर रोही बाईपास बना दिया गया जिससे भरवारी के लोगो को जाम से छुटकारा मिल सके।
 आपको बतादे अभी 15 दिन पहले रोही बाईपास का एक तरफ का हिस्सा टूट गया था जिससे लोगो मे हड़कंप मच गया था तभी चायल विधायक ने सेतु निगम के अधिकारियों से बात करके उस सेतु के टूटने की जांच चालू करवाया था और सेतु को फिर से बना दिया गया था लेकिन 22 जून को फिर से बाईपास के दूसरी तरफ के लेन का एक हिस्सा फिर से गिर गया जिससे लोगो मे दोबारा हड़कंप मच गया।

इस पुल का पहला हिस्सा 15 दिन पहले  टूट चुका था जिससे उस तरफ से वाहन का आवागमन उस हिस्से से रोक दिया गया था लेकिन पुल का दूसरा हिस्सा भी ज्यादा दिन तक आवागमन के भार को नहीं सह सका और देखते-देखते रेलवे पुल का दूसरा हिस्सा भी टूट टूट कर गिरने लगा जिसके चलते आज 22 जून को रेलवे पुल के दूसरे हिस्से को भी आवागमन बंद करने का निर्देश  प्रशासन ने दे दिया है ।

आपको बतादे इस बाईपास पर एक बड़ा सवाल है और भ्रष्टाचार मुक्त भाजपा की सरकार में अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी यह भी एक बड़ा सवाल लोगों के बीच में चर्चा का विषय बना हुआ है

पुल के दोनों रास्ते टूट जाने की खबर मिलते ही रेलवे ओवरब्रिज के अधिकारियों ने अपने सहायकों को भेज कर मौके की स्थिति मंगाई ।
 वैसे रेलवे पुल का हिस्सा टूट टूट कर गिरने से सेतु निर्माण निगम और कार्यदाई संस्था के जिम्मेदारों के बीच में खलबली मची हुई है अब देखना है कि केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार इन भ्रष्ट ठेकेदारों इंजीनियरों और अधिकारियों को पुल टूटने का दोषी मानकर इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजने में कितना समय लगाती है।

 नवनिर्मित पुल टूटने की जानकारी मिलने पर कौशाम्बी सांसद वीनोद सोनकर भी मौके पर पहुचे और मौके की जांच कर केंद्र सरकार को अवगत कराने की बात की व उन्होंने कहा ये सपा शासनकाल का पाप है जो धीरे धीरे सामने आ रहा है। वही मौके पर सांसद जी के साथ कौशाम्बी डीएम व एसपी मौजूद रहे।

वही घटना की जानकारी चायल विधायक संजय गुप्ता जी को हुई तो वो भी रोही बाईपास पहुंच गए और घटनास्थल की जांच की और कहा कि इस ब्रिज में घटिया सीमेंट और बालू की घोल प्रयोग किया गया  जिसे हाथो से तोड़ने पे टूटता जा रहा है और इतनी पतली सरिया इसमें प्रयोग किया गया है जिसे अब आदमी अपने घरों में बहुत ही कम प्रयोग करते है।


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